हरियाणा में प्रति व्यक्ति आय में गुरुग्राम टॉप पर, नूंह सबसे पीछे, दोनों में 10 गुना का अंतर
समान औद्योगिक विकास नहीं होने के कारण हरियाणा के कई जिले प्रति व्यक्ति आय में पिछड़े

सत्य खबर हरियाणा
Per Capta Income in Haryana : हरियाणा के जिलों की प्रति व्यक्ति आय के ताजा आंकड़ों ने प्रदेश के आर्थिक विकास की असल तस्वीर सामने ला दी है। राज्य में आर्थिक प्रगति की रफ्तार एक समान नहीं है। जहां औद्योगिक और शहरी जिलों में प्रति व्यक्ति आय तेजी से बढ़ी है, वहीं कई जिलों में विकास की गति अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है। हरियाणा के नूंह जिले में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की आय केवल 188 रुपए है, जबकि गुरुग्राम में यह 1866 रुपए है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार गुरुग्राम 6,81,085 रुपये की प्रति व्यक्ति आय के साथ प्रदेश का सबसे समृद्ध जिला बनकर उभरा है, जबकि नूंह 68,848 रुपये के साथ सबसे पीछे है। यह अंतर प्रदेश में औद्योगिक विकास, निवेश, शहरीकरण और रोजगार के अवसरों के असमान वितरण को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
आर्थिक मामलों के जानकार डॉ रामजीलाल का मानना है कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिन जिलों में उद्योग, सेवा क्षेत्र और बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है, वहां आय में तेजी आई है, जबकि ग्रामीण और कम विकसित क्षेत्रों में आर्थिक अवसर सीमित रहने से आय वृद्धि धीमी रही है।
औद्योगिक ताकत से आगे गुरुग्राम और फरीदाबाद
आंकड़ों के अनुसार गुरुग्राम सबसे अधिक आय वाला जिला है। आईटी उद्योग, कॉरपोरेट सेक्टर, रियल एस्टेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की मौजूदगी ने जिले की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है। इसके बाद फरीदाबाद 3,28,083 रुपये के साथ दूसरे स्थान पर है, जहां औद्योगिक इकाइयों और विनिर्माण क्षेत्र का बड़ा योगदान रहा है।
तीसरे स्थान पर पानीपत (2,81,365 रुपये) है, जो टेक्सटाइल उद्योग, रिफाइनरी और निर्यात आधारित व्यापार के लिए जाना जाता है। वहीं पंचकूला (2,42,541 रुपये) और अंबाला (1,97,256 रुपये) भी उच्च आय वाले जिलों में शामिल हैं। इन जिलों में व्यापार, सेवा क्षेत्र और बेहतर शहरी सुविधाओं ने आय स्तर को ऊपर उठाया है।
सत्ता की भूमिका का असर नहीं
अक्सर इस बात का जिक्र किया जाता है कि जिस क्षेत्र से मुख्यमंत्री बनता है वह तेजी से तरक्की करता है लेकिन अगर प्रति व्यक्ति आय के मामले देखे जाए तो स्पष्ट होता है कि आम आदमी के जीवन में इसका कोई असर नहीं है। हरियाणा में लंबे समय तक राज करने वाले पांच परिवार मुख्य रूप से कहे जा सकते हैं जिनमें भजनलाल, बंसीलाल, देवीलाल, भूपेंद्र सिंह हुड्डा और मनोहर लाल शामिल हैं। भजनलाल का हिसार जिला प्रति व्यक्ति आय में 14वें स्थान पर है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा का रोहतक जिला दसवें स्थान पर है। बंसी लाल का भिवानी जिला नीचे से तीसरे स्थान पर है। देवीलाल का सिरसा जिला नीचे से सातवें स्थान पर है। मनोहर लाल का करनाल जिला 11वें स्थान पर है। यह इस बात का प्रमाण है कि सत्ता में बैठे लोग अपने क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाए। उन्होंने अपने जिले को चमकाने का काम भले किया लेकिन प्रति व्यक्ति आय बढ़े, इस बात की कोई व्यवस्था नहीं की है।
मध्यम श्रेणी के जिलों में संतुलित विकास
राज्य के कई जिलों में प्रति व्यक्ति आय मध्यम स्तर पर दर्ज की गई है। इनमें रेवाड़ी (1,78,493), झज्जर (1,75,949), कुरुक्षेत्र (1,73,694), सोनीपत (1,71,697), रोहतक (1,53,276) और करनाल (1,51,608) जैसे जिले शामिल हैं।
इसी प्रकार कैथल (1,38,403), यमुनानगर (1,35,658), हिसार (1,29,135), फतेहाबाद (1,29,068), जींद (1,27,768), सिरसा (1,27,881) और महेंद्रगढ़ (1,24,535) में कृषि, लघु उद्योग और सेवा क्षेत्र के संयुक्त प्रभाव से आय का स्तर स्थिर बना हुआ है।
निचले पायदान पर नूंह, पलवल और भिवानी
प्रति व्यक्ति आय के मामले में नूंह सबसे पीछे रहा है। इसके अलावा पलवल (90,602), भिवानी (1,11,188) और चरखी दादरी (1,17,759) जैसे जिलों में भी आय का स्तर अपेक्षाकृत कम है।
डॉ. रामजीलाल का कहना है कि इन जिलों में बड़े औद्योगिक निवेश की कमी, सीमित रोजगार अवसर, शिक्षा और कौशल विकास के कम अवसर तथा बुनियादी ढांचे की धीमी प्रगति आय कम होने के प्रमुख कारण हैं। ग्रामीण आबादी पर अधिक निर्भरता और निजी निवेश का अभाव भी आर्थिक विकास को प्रभावित करता है।
औद्योगिक निवेश के कारण है गुरुग्राम सबसे अमीर
आर्थिक मामलों के जानकार डॉक्टर रामजीलाल के अनुसार जिन जिलों में प्रति व्यक्ति आय अधिक है, वहां औद्योगिक निवेश, कॉरपोरेट गतिविधियां, बेहतर सड़क व परिवहन नेटवर्क, शहरीकरण और सेवा क्षेत्र का विस्तार प्रमुख कारण हैं। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे जिलों में आईटी, विनिर्माण और निजी क्षेत्र के निवेश ने आय को तेजी से बढ़ाया है। वहीं कृषि उत्पादकता, मंडी व्यवस्था और कृषि आधारित उद्योगों के कारण पानीपत, करनाल और हिसार जैसे जिलों में भी आय में स्थिर वृद्धि देखी गई है।
दूसरी ओर जिन जिलों में आय कम है, वहां औद्योगिक आधार कमजोर है, रोजगार के अवसर सीमित हैं और कौशल विकास की कमी है। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा, औद्योगिक क्लस्टर, लघु उद्योगों को बढ़ावा और बुनियादी ढांचे के विस्तार से कम आय वाले जिलों की आर्थिक स्थिति में सुधार संभव है।
उन्होंने कहा कि संतुलित क्षेत्रीय विकास की नीति अपनाकर हरियाणा न केवल आय असमानता कम कर सकता है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत बना सकता है।
जिला और प्रति व्यक्ति आय इन आंकड़ों में हांसी को हिसार जिले में शामिल किया गया है
गुरुग्राम 6,81,085
फरीदाबाद 3,28,083
पानीपत 2,81,365
पंचकूला 2,42,541
अंबाला 1,97,256
रेवाड़ी 1,78,493
झज्जर 1,75,949
कुरुक्षेत्र 1,73,694
सोनीपत 1,71,697
रोहतक 1,53,276
करनाल 1,51,608
कैथल 1,38,403
यमुनानगर 1,35,658
हिसार 1,29,135
फतेहाबाद 1,29,068
सिरसा 1,27,881
जींद 1,27,768
महेंद्रगढ़ 1,24,535
चरखी दादरी 1,17,759
भिवानी 1,11,188
पलवल 90,602
नूंह 68,848